ब्यूरो रिपोर्ट।
खानपुर। मुख्य विकास अधिकारी आकांशा कोण्डे के निर्देशों के तहत, ग्रामोत्थान परियोजना के जिला परियोजना प्रबंधक (डीपीएम) श्री संजय सक्सेना द्वारा खानपुर ब्लॉक स्थित सिंघाड़ा प्रोसेसिंग यूनिट का निरीक्षण किया गया और उनकी उपस्थिति में यूनिट का सफलतापूर्वक संचालन शुरू करवाया गया।
इस अवसर पर महाराष्ट्र से आई एक विशेष टीम ने भी यूनिट का भ्रमण किया। इस टीम में भवना पंड्या (मुख्य इनक्यूबेशन अधिकारी और प्रमुख, रिसर्च इनोवेशन इनक्यूबेशन डिजाइन लैबोरेटरीज), पूजा पोरवालकर (कार्यक्रम प्रबंधक, रिसर्च इनोवेशन इनक्यूबेशन डिजाइन लैबोरेटरीज), रुष्वा परिहार (प्रमुख, ओम्निएक्टिव इम्प्रूविंग लाइव्स फाउंडेशन), चैतन्य देसाई (ओम्निएक्टिव हेल्थ टेक्नोलॉजीज), मानसी परिहार (कार्यक्रम समन्वयक, ओम्निएक्टिव इम्प्रूविंग लाइव्स फाउंडेशन), और “गो हेम्प” के संस्थापक दंपत्ति श्री गौरव दीक्षित एवं श्रीमती नम्रता कंडवाल शामिल रहे।
भ्रमण के दौरान, डीपीएम श्री संजय सक्सेना ने टीम को यूनिट के संचालन प्रक्रिया (SOP), मार्केटिंग रणनीति, और यूनिट के विभिन्न कार्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। निरीक्षण के बाद, चैतन्य देसाई ने यूनिट की प्रशंसा करते हुए इसे “उच्च गुणवत्ता और उत्कृष्ट मानकों वाली प्रोसेसिंग यूनिट” बताया, जो स्थानीय किसानों को लाभ पहुंचाने और उनकी आय में वृद्धि करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
साथ ही, श्री देसाई ने उनकी कंपनी की ओर से CSR सपोर्ट (कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) प्रदान करने का प्रस्ताव रखा और स्थानीय स्टार्टअप्स को भी इस पहल से जोड़ने और उन्हें समर्थन देने की बात कही। इससे क्षेत्र में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा, जिससे नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
इसके उपरांत, लक्सर विकासखंड में सीएलएफ (क्लस्टर लेवल फेडरेशन) की महिलाओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में महिलाओं ने जुट आधारित आजीविका गतिविधियां शुरू करने में आ रही समस्याओं को साझा किया। डीपीएम श्री संजय सक्सेना ने उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना और मौके पर ही समाधान सुझाए, जिससे महिलाओं को अपने उद्यमों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
इसके साथ ही, जिला मिशन प्रबंधक (NRLM) के साथ खानपुर विकासखंड में बैंक लोन से संबंधित विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य उद्यमशील महिलाओं और स्थानीय किसानों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़कर उनके व्यवसायों के लिए वित्तीय सहायता सुनिश्चित करना रहा।
यह पूरी पहल ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से की गई है। ग्रामोत्थान परियोजना निरंतर इस दिशा में कार्यरत है, ताकि स्थानीय किसानों और महिलाओं को नए-नए अवसरों से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति को सशक्त किया जा सके।
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