ब्यूरो रिपोर्ट।
हरिद्वार। हरिद्वार जिले के खानपुर विकासखंड के छोटे से गाँव लालचंद वाला की रहने वाली 32 वर्षीय साजिदा ने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए बकरी पालन व्यवसाय को अपनाया। वह “शहजादी स्वयं सहायता समूह” और “नीलकंठ ग्राम संगठन” की सक्रिय सदस्य हैं, जो “वीर सीएलएफ” से जुड़ा हुआ है, और आज वे आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी हैं।
पहले उनका परिवार खेती और मजदूरी पर निर्भर था, जिससे आय बहुत सीमित थी। इसी दौरान उन्होंने समूह की बैठक में “ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना” के बारे में सुना, जो गरीब परिवारों को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए आर्थिक सहायता देती है। इस योजना के तहत उन्हें “अल्ट्रा पुअर पैकेज” के अंतर्गत ₹35,000 की ब्याज मुक्त सहयोग राशि प्राप्त हुई और उन्होंने अपनी बचत से ₹16,500 जोड़े। इस राशि से उन्होंने चार बकरियाँ खरीदीं और उनके लिए आश्रय एवं चारे-पानी की उचित व्यवस्था की।
शुरुआत में यह काम चुनौतीपूर्ण था, लेकिन उन्होंने पूरी लगन और मेहनत से बकरियों की देखभाल की। उनकी मेहनत रंग लाई और छह महीनों में उनकी बकरियों ने बच्चे दिए, जिससे उनकी कुल संख्या बढ़कर 10 हो गई। इससे न केवल उनकी संपत्ति बढ़ी, बल्कि आय का एक स्थायी स्रोत भी तैयार हुआ।
धीरे-धीरे साजिदा ने अपने व्यवसाय को बढ़ाने पर ध्यान दिया। उन्होंने स्वास्थ्य प्रबंधन और सही पोषण पर विशेष ध्यान दिया, जिससे उनकी बकरियाँ स्वस्थ और तेजी से विकसित हो सकीं। एक साल के भीतर उन्होंने चार बकरियों को स्थानीय बाजार में बेचकर ₹20,000 की कमाई की, जिससे उन्हें अपने व्यवसाय को और आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिली। अब वे बकरियों के दूध को बेचने की संभावनाओं पर भी काम कर रही हैं, ताकि आय के नए स्रोत विकसित किए जा सकें।
उनकी इस सफलता ने न केवल उनके परिवार को आर्थिक मजबूती दी, बल्कि गाँव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का काम किया। साजिदा अब चाहती हैं कि अन्य महिलाएँ भी इस तरह के छोटे व्यवसाय शुरू करें और आत्मनिर्भर बनें।
आने वाले वर्षों में साजिदा अपने व्यवसाय को और विस्तार देने की योजना बना रही हैं। वे पाँच और बकरियाँ खरीदने और बकरी के दूध व अन्य डेयरी उत्पादों की बिक्री शुरू करने का विचार कर रही हैं।
उनकी यह कहानी दिखाती है कि यदि सही योजना, सरकारी सहयोग और मेहनत के साथ काम किया जाए, तो कोई भी आत्मनिर्भर बन सकता है। “ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना” जैसी योजनाएँ ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का सशक्त माध्यम साबित हो रही हैं।
साजिदा की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि अगर मेहनत, सही योजना और सरकार की मदद मिले, तो सीमित संसाधनों के बावजूद महिलाएँ अपने जीवन को बेहतर बना सकती हैं।
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