ब्यूरो रिपोर्ट।
हरिद्वार जनपद के भगवानपुर विकासखंड के छापुर गांव की निवासी आयशा, जो पहले अपने छोटे से घरेलू सिलाई व्यवसाय से सीमित आमदनी अर्जित कर रही थीं, आज ‘रेडिमेड गारमेंट’ बिजनेस की सफल उद्यमी बन चुकी हैं। उनकी यह यात्रा ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना (रीप)/ग्रामोत्थान परियोजना के सहयोग से संभव हो सकी।
वर्ष 2018 में, उन्होंने अपने गाँव की कुछ महिलाओं के साथ मिलकर ‘मुस्कान स्वयं सहायता समूह’ का गठन एनआरएलएम से सहयोग से किया और जो ‘प्रगति ग्राम संगठन’ के माध्यम से ज्योतिर्मय बहुउद्देशीय स्वायत्त सहकारिता से जुड़ कर स्वावलंबन की ओर कदम बढ़ाया। शुरुआत में, वे हर महीने मात्र ₹4000-₹5000 कमा पाती थीं, जिससे परिवार की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो रहा था।
2024-25 में, ग्रामोत्थान/रीप परियोजना के तहत उनकी आर्थिक स्थिति का आकलन किया गया और उन्हें अपने व्यवसाय के विस्तार के लिए प्रेरित किया गया। परियोजना के तहत, उन्हें ₹30,000 की वित्तीय सहायता, ₹50,000 का बैंक लोन और ₹20,000 की स्वयं की पूंजी से कुल ₹1,00,000 का निवेश मिला। इस सहायता से उन्होंने रेडिमेड गारमेंट व्यवसाय की शुरुआत की।
आज, आयशा का व्यवसाय निरंतर बढ़ रहा है, जिससे वे हर महीने ₹15,000-₹20,000 की शुद्ध बचत कर रही हैं। यह सफलता उनके परिवार के जीवन स्तर को सुधारने के साथ-साथ अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बनी है।
आयशा की यह कहानी दिखाती है कि सही मार्गदर्शन और वित्तीय सहयोग से ग्रामीण महिलाएँ आत्मनिर्भर बन सकती हैं और अपने परिवार एवं समाज के आर्थिक विकास में योगदान दे सकती हैं।
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