उत्तराखंड

NHAI ने अपनी खामियां छुपाने के लिए ऋषभ पंत के एक्सिडेंट वाली जगह पर रातों रात भर दिए गड्ढे ,

अनिल सैनी।

दो दिन पहले भारतीय क्रिकेटर ऋषभ पंत का एक्सीडेंट बेहद दुखद है उत्तराखंड के प्रवेश द्वार कहे जाने वाले नारसन बॉर्डर के पास यह पूरी घटना हुई, उसके बाद स्थानीय लोगों व हरियाणा रोडवेज के बस ड्राइवर और कंडक्टर के द्वारा ऋषभ पंत कि काफी सहायता की गई जिससे समय रहते उनका उपचार शुरू हो गया।

कल शनिवार को दिल्ली और देहरादून से कुछ टीमें घटना की बारीकी से जांच करने के लिए आई थी आखिरकार घटना किस वजह से हुई होगी, स्थानीय पुलिस और स्थानीय लोगों ने टीम को सभी जानकारी दी जो भी उन्हें पता थी लेकिन जहां पर ऋषभ पंत की कार का एक्सीडेंट हुआ वहां एक बड़ी खामी एनएचएआई की भी सामने नजर आ रही है।

आपको बता दे की इस हाईवे के बीच में सिंचाई विभाग का एक राजवाहा आ रहा है जिसकी वजह से सड़क की जो न्यूनतम चौड़ाई है वह इस जगह पर आधी के आसपास रह गई है साथ ही साथ इसी लोकेशन पर सड़क पर बने काफी गड्ढे भी हादसों को दावत दे रहे हैं लेकिन जब किसी सेलिब्रिटी या बड़े आदमी की इस तरह से घटना हो जाती है तो सरकार द्वारा सारी औपचारिक व्यवस्थाएं देखी जाती है लेकिन जब किसी मध्यमवर्गीय या गरीब व्यक्ति का एक्सीडेंट या उसके साथ कोई दुर्घटना हो जाती है तो उस पर कोई भी सरकार या संबंधित अधिकारी ध्यान नहीं देता है।

कल जब जांच करने वाली टीमें यहां पर जांच कर रही थी तो उन्होंने सड़क के बीच में आने वाले राजवाहे के साथ-साथ उसी लोकेशन पर सड़क पर बने गड्ढे को देखकर घटना की आशंका जताई जा रही थी मतलब यह कि हो सकता है की सड़क के बीच में राजवाहे का आना या इसी लोकेशन पर बने गड्ढे को बचाने के लिए ऋषभ पंत की गाड़ी का एक्सीडेंट होना यह भी एक कारण हो सकता है।

अपनी दोनों खामियां छुपाने के लिए एनएचएआई द्वारा कल रात जब पूरी दुनिया नए साल के जश्न में मना रही थी तब एन ए एच आई के कर्मचारी ऋषभ पंत के एक्सीडेंट वाली जगह पर सड़क पर बने गड्ढों को भर रही थी मतलब सड़क पर बने गड्ढों को रातो रात बंद कर दिया गया और वहां पर नई सड़क बिछा दी गई जिससे जांच करने वाली टीम  एनएचएआई पर इल्जाम ना लगा सके की आपकी सड़क पर बने गड्ढे भी ऋषभ पंत की गाड़ी के एक्सीडेंट की वजह हो सकते है।

लेकिन सवाल तो उठना लाजमी है एनएचएआई द्वारा उत्तराखंड के प्रवेश द्वार से लेकर मंगलौर तक दो-तीन  जगह ऐसी भयानक स्थिति में है जहां पर लगभग 1 साल में 10- 15 घटना आराम से हो जाती हैं जिनमें काफी लोगों की मृत्यु भी हो चुकी है लेकिन एनएचएआई के कानों पर जूं नहीं रेंगती, अब देखने वाली बात यह होगी की एन ए एच आई द्वारा इन सभी जगह को चिन्हित करके आने वाले समय में इसका क्या समाधान होगा।

anilkumar

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